लॉकडाउन के दौरान विश्रामघाटों पर अंत्येष्टि में शामिल होने पहुंच रहे सिर्फ 10 से 12 लोग

काेराेना ने हर तरफ खामाेशी फैला दी है। समय की जरूरत है। हाे सकता है यह खामाेशी या एकाकीपन ही इस नए वायरस का इलाज हाे। प्रशासन ने श्मशानाें में अंतिम क्रिया के लिए शव के साथ जाने वाले लाेगाें की भी संख्या तय कर दी है। दैनिक भास्कर ने साेमवार काे शहर के श्मशानघाटाें पर जाकर देखा। यहां अब शव यात्राओं में हमेशा की तरह भीड़ नहीं दिखती। किसी शव के साथ 10 - 12 ताे किसी की अंतिम क्रिया में 15-20 लाेग। 
प्रशासन ताे ज्यादा लाेगाें काे एक साथ आने की इजाजत नहीं ही देता, स्वयं लाेग भी ज्यादा संख्या में नहीं अाना चाहते। बड़ी बात यह है कि मृतक के परिजन ही लाेगाें - रिश्तेदाराें से कम संख्या में अाने के लिए कह रहे हैं। 
श्मशान घाट में जाकर देखाे ताे लगता है - ये मरघट जैसी खामाेशी है या खामाेशी के मरघट। चूंकि सड़काें पर वाहनाें की आवाजाही लगभग बंद है, इसलिए सड़क दुर्घटनाएं नहीं हाे रही हैं, अाैर इस वजह से जिन मरघटाें में 4 - 6 शव राेज आया करते थे, उनकी संख्या भी आधी हाे चुकी है। 



पुराना शहर के चौक लक्ष्मी गली निवासी सराफा व्यवसायी मदनलाल सोनी का 68 वर्ष की आयु में सोमवार को सुबह सात बजे सोमवारा स्थित एक निजी अस्पताल में हार्ट अटैक से निधन हो गया। उनके भतीजे ओम सोनी ने बताया कि लाक डाउन के चलते कोतवाली पुलिस को सूचित किया गया। पुलिस ने कम से कम लोगों के जाने की अनुमति दी। शांति वाहन से सभी लोग छोला विश्रामघाट पहुंचे। यहां करीब 20 लोग ही उपस्थित हो सकें। बाद में कुछ और लोग आ गए थे। 


सुभाष नगर विश्रामघाट के व्यवस्थापक शोभराज ने बताया कि लाॅकडाउन के चलते सभी विश्रामघाटों में अंतिम संस्कार के लिए शव यात्रा में अाने वाले लोगों की संख्या काफी कम रहती है। सभी लोग मास्क या रुमाल लगाए रखते हैं।  उन्होंने बताया कि सुभाष नगर विश्रामघाट में गत 25 से 30 मार्च तक कुल 35 मृतकों के अंतिम संस्कार किए गए, जबकि इस अवधि में छोला विश्रामघाट में अंतिम संस्कार की संख्या करीब 16 है। दूसरी ओर भदभदा विश्रामघाट कमेटी के पदाधिकारी अजय दुबे ने बताया कि गत 28 व 29 मार्च को यहां एक भी अंतिम संस्कार नहीं हुअा, जबकि सोमवार को छह मृतकों की अंत्येष्टि की गई। दुबे ने बताया कि लाक डाउन के चलते विश्रामघाटों में अंतिम संस्कार की संख्या में कमी अाई है। इसके पीछे जानकार एक कारण सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु पर रोक लगना भी मान रहे हैं।